क्रायोजेनिक इंजन क्या है ? क्रायोजेनिक इंजन कैसे काम करता है ?

नमस्कार दोस्तों ; आजकल दुनिया स्पेस रिसर्च में एक से एक तकनीक विकसित कर रही है , और रॉकेट का उपयोग कृत्रिम उपग्रहों, प्रक्षेपण यान इत्यादि के लिए बढ़ते ही जा रहा है।

लेकिन क्या आपको पता है राकेट में कौन सा इंजन उपयोग किया जाता है ! 

राकेट इंजन में सामान्यतः क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग किया जाता है , इसीलिए आज हम इस आर्टिकल में एक क्रायोजेनिक  इंजन के बारे में समझेंगे जो जयादातर राकेट और जेट में उपयोग किया जाता है। 

तो आईये समझते है –

 

क्रायोजेनिक क्या है ?

क्रायोजेनिक इंजन को समझने से पहले हमे सबसे पहले क्रायोजेनिक शब्द का मतलब समझना होगा , क्रायोजेनिक दो ग्रीक शब्द ” Kryo ” और ” Gen ”  से बना है।

” Kryo ” का मतलब होता है बहुत ठंडा और  ” Gen ” का मतलब होता है उत्पादन करना। 

बहुत ही कम तापमान पर पावर उत्पन्न करना भौतिकी विज्ञान में क्रायोजेनिक्स कहलाता है।  

और वैसी इंजीनियरिंग जिसमे बहुत कम तापमान का अध्ययन शामिल हो, और उसका उत्पादन कैसे किया जाता है उसके बारे अध्यन किया जाता होता हो क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग कहलाता है। 

आपको क्रायोजेनिक का मतलब समझ आ गया होगा ,अब आईये  क्रायोजेनिक इंजन क्या होता है उसके बारे में समझते है।

 

क्रायोजेनिक इंजन क्या होता है ?

ये एक ऐसा इंजन होता जिसमे सामान्यतः ईंधन लिक्विड हाइड्रोजन होता है , लिक्विड हाइड्रोजन का तापमान – 253 डिग्री सेल्सियस से भी कम रहता और आक्सीकारक ( ऑक्सीजन ) होता है जिसका तापमान – 183 डिग्री सेल्सियस से भी कम रहता है।
 
ये इंजन बहुत कम तापमान वाली ईंधन से उपयोगी थ्रस्ट उत्पन्न करती है।
क्रायोजेनिक इंजन जयादातर रॉकेट्स और जेट में उपयोग किया जाता है। 

 

क्रायोजेनिक इंजन का इतिहास :

क्रायोजेनिक इंजन सबसे पहले सन 1962 में अमेरिका ने SM-65 एटलस डी मिसाइल में उपयोग किया था। 

SM-65 एटलस डी मिसाइल  को फ्लोरिडा में केप कैनावेरल वायु सेना स्टेशन से लांच किया था। 

अभी दुनिया में सिर्फ छह देश ही है जो जिनके पास क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन हैं जैसे की चीन , इंडिया, अमेरिका , रूस , फ्रांस , और जापान। 

 

क्रायोजेनिक इंजन के मुख्य घटक

फ्यूल टैंक ( Fuel Tank )

इसमें फ्यूल होता है जो जयादातर लिक्विड हाइड्रोजन होता है। 

आक्सीकारक  टैंक ( Oxidizer Tank )

आक्सीकारक टैंक में लिक्विड ऑक्सीजन होता है 

टर्बोपंप ( Turbo Pump )

इसमें सामान्यतः दो टर्बोपंप होते है जो लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन को उच्च दबाब पर दहन कक्ष में भेजता है। 

दहन कक्ष ( Combustion Chamber )

इसमें ऑक्सीजन लिक्विड और हाइड्रोजन लिक्विड दोनों मिक्स होता है और इग्निटर के मदद से जलता है। 

इग्निटर ( Ignitor )

ये दहन कक्ष में फ्यूल को जलाने में  मदद करता है। 

नोजल ( Nozzle )

इसमें convergent- divergent नोजल होता है जो दहन कक्ष से उत्पन्न गैस को हाइपरसोनिक वेग पर बाहर निकालता है। 

 

क्रायोजेनिक इंजन कैसे काम करता है ?

क्रायोजेनिक इंजन आमतौर पर Newton के तीसरे नियम पर काम करता है। 

इसमें फ्यूल चैम्बर होता है जिसमे सामान्यतः लिक्विड हाइड्रोजन होता है जिसका तपन – 253 डिग्री सेल्सियस भी कम रहता है। 

एक ऑक्सीकारक टैंक होता है जिसमे लिक्विड ऑक्सीजन होता है जो ऑक्सीकारक का काम करता है क्योंकि आपको पता है स्पेस में ऑक्सीजन नहीं होता है।  

वहां ईंधन जलाने के लिए ऑक्सीजन चाहिए इसीलिए क्रायोजेनिक इंजन में एक ऑक्सीकारक टैंक होता है। 

दोनों चैम्बर में एक एक टर्बोपंप लगे होते है जो उच्च दबाब पर हाइड्रोजन लिक्विड और ऑक्सीजन लिक्विड को दहन कक्ष में भेजता है। 

दहन कक्ष में दोनों लिक्विड मिक्स होते है और दहन कक्ष के ऊपर इग्निटर लगा होता है जो ईंधन को जलाने में मदद करता है। 

जैसे ही ईंधन जलने लगता है ये लिक्विड गैस में बदलने लगता है और ये कनवर्जेंट -डिवेर्जेंट नोजल के द्वारा हाई थ्रस्ट उत्पन्न करता है जो हाइपरसोनिक वेग पर बहार निकलता है। 

जिसका वेग लगभग 4.4 Km/s  होता है। 

 

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Conclusion: दोस्तों आज हमने क्रायोजेनिक इंजन क्या है, क्रायोजेनिक इंजन के घटक और क्रायोजेनिक इंजन कैसे काम करता है समझा।  

यदि क्रायोजेनिक इंजन से सम्बंधित कोई और प्रश्न या सुझाव हो तो हमारे साथ जरूर शेयर करे। 

और हाँ दोस्तों आज का आर्टिकल कैसा लगा कमेंट कर के जरूर बताये और अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करे।

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